➤ अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड को तीन साल की अवधि से बाहर स्थायी बनाने की मांग
➤ सीएम सुक्खू ने गठन संबंधी आदेशों में संशोधन का दिया आश्वासन
➤ बोर्ड में सेवानिवृत्त अर्धसैनिक कर्मियों को प्रतिनिधित्व देने की भी मांग
शिमला। हिमाचल प्रदेश में अर्धसैनिक बलों के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों तथा उनके परिवारों के कल्याण से जुड़ी व्यवस्था को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। राज्य भूतपूर्व अर्धसैनिक वेलफेयर एवं कोऑर्डिनेशन एसोसिएशन और अखिल भारतीय पूर्व अर्धसैनिक कल्याण एवं समन्वय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सचिवालय में मुख्यमंत्री के सामने प्रदेश में गठित अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड को तीन वर्ष की सीमित अवधि के बजाय स्थायी स्वरूप देने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में बोर्ड के गठन संबंधी आदेशों में आवश्यक संशोधन करने की दिशा में कदम उठाने का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल की यह मुलाकात प्रदेश के कर्मचारियों की बैठक के दौरान हुई। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सेवानिवृत्त डीआईजी एवं अध्यक्ष वीके शर्मा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष नंद लाल नेहर्टू ने किया। प्रतिनिधिमंडल में वीर सिंह वर्मा, चेत राम, सुरेश कलसाईक, मोहन लाल, रूप लाल ठाकुर, पूर्ण चंद, लक्ष्मी चंद और नंद लाल हिमालवी भी शामिल रहे।
तीन साल की अवधि के बजाय स्थायी व्यवस्था की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष कहा कि प्रदेश में अर्धसैनिक कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए गठित बोर्ड को केवल तीन वर्ष की अवधि तक सीमित रखना उचित नहीं होगा। उनकी मांग थी कि बोर्ड को स्थायी व्यवस्था के तौर पर जारी रखा जाए, ताकि अर्धसैनिक कर्मियों और उनके परिवारों से जुड़े मुद्दों को लगातार सरकार के सामने रखा जा सके।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के अनुसार, स्थायी व्यवस्था होने से कल्याण से जुड़े मामलों को एक नियमित संस्थागत मंच मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की मांग पर बोर्ड के गठन संबंधी आदेशों में आवश्यक संशोधन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, मौजूदा जानकारी के अनुसार यह आश्वासन है और बोर्ड को स्थायी स्वरूप देने के लिए आगे आवश्यक सरकारी प्रक्रिया और संशोधन किया जाना बाकी है।
सेवानिवृत्त अर्धसैनिक कर्मियों को प्रतिनिधित्व की मांग
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने केवल बोर्ड के स्थायी स्वरूप का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि इसमें सेवानिवृत्त अर्धसैनिक कर्मियों को उचित प्रतिनिधित्व देने का आग्रह भी किया। एसोसिएशन ने इसके लिए वीके शर्मा, नंद लाल नेहर्टू और बलदेव राणा के नामों पर विचार करने का अनुरोध किया।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि बोर्ड में सेवानिवृत्त अर्धसैनिक कर्मियों की भागीदारी रहने से उनके अनुभव और उनसे जुड़े मुद्दों को व्यवस्था के सामने रखने में मदद मिल सकती है। इस मांग को भी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।
सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों के परिवारों से जुड़े मुद्दे
अर्धसैनिक बलों से जुड़े कर्मियों और उनके परिवारों के लिए कल्याण संबंधी कई विषय महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में प्रतिनिधिमंडल ने बोर्ड को स्थायी स्वरूप देने की मांग को लंबे समय तक चलने वाली कल्याण व्यवस्था से जोड़कर मुख्यमंत्री के सामने रखा।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद उनका आभार व्यक्त किया। संगठन ने इस पहल को प्रदेश में सेवारत और सेवानिवृत्त अर्धसैनिक बलों के जवानों तथा उनके परिवारों के कल्याण से जुड़ा विषय बताया।
स्थायी बोर्ड से क्या उम्मीद जताई गई
एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि यदि बोर्ड को स्थायी स्वरूप मिलता है तो अर्धसैनिक कर्मियों और उनके परिवारों की समस्याओं को सरकार के सामने रखने के लिए एक नियमित और मजबूत व्यवस्था कायम हो सकेगी। संगठन के अनुसार इससे कल्याण से जुड़े मुद्दों को संस्थागत स्तर पर उठाने का रास्ता मजबूत हो सकता है।
फिलहाल मुख्यमंत्री की ओर से बोर्ड के गठन संबंधी आदेशों में आवश्यक संशोधन करने का आश्वासन दिया गया है। इसलिए आगे की प्रक्रिया में यह देखना होगा कि प्रस्तावित संशोधन किस रूप में किए जाते हैं और बोर्ड के स्थायी स्वरूप को लेकर सरकार की ओर से औपचारिक निर्णय कब सामने आता है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
बैठक के बाद एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। संगठन की ओर से कहा गया कि बोर्ड को स्थायी व्यवस्था बनाने की दिशा में मिला आश्वासन अर्धसैनिक कर्मियों और उनके परिवारों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
अब इस मामले में अगला चरण बोर्ड के गठन संबंधी आदेशों में आवश्यक संशोधन से जुड़ा होगा। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि सरकार इस संबंध में आगे आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेगी।



